माँ बगलामुखी पूजा (पीतांबरा माता) दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिन्हें स्तंभन शक्ति (रोकने या स्थिर करने) की देवी माना जाता है। यह पूजा शत्रुओं के नाश, कानूनी मुकदमों में विजय, व्यापार में सफलता, और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। उनकी साधना से भय का नाश होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, विशेषकर मंगल दोष के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए। माँ बगलामुखी पूजा का महत्व और लाभ (Baglamukhi Puja Significance): शत्रु और विवाद का अंत: बगलामुखी माता को ‘शत्रु नाशिनी’ कहा जाता है। यह पूजा शत्रुओं को स्तंभित (निष्क्रिय) करने और न्यायालयीन मुकदमों (कोर्ट केस) में विजय दिलाने के लिए की जाती है। संकट निवारण: जीवन में अचानक आने वाली बाधाओं, दुर्घटनाओं, और बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए माता की आराधना बहुत खास मानी जाती है। व्यापार और करियर में सफलता: यह पूजा व्यवसाय में वृद्धि, रुके हुए काम पूरे करने और प्रतियोगिता में सफलता पाने के लिए की जाती है। तांत्रिक महत्व: तंत्र शास्त्र में यह माता अत्यंत शक्तिशाली हैं और मन को शांत करके विपरीत परिस्थितियों में भी स्थिरता प्रदान करती हैं। पीले रंग का महत्व: माता को पीला रंग बहुत प्रिय है, इसलिए पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, और हल्दी का उपयोग मुख्य रूप से किया जाता है। पूजा के नियम: माँ बगलामुखी की साधना विशेष रूप से रात्रि में की जाती है और इसे किसी कुशल ब्राह्मण (पंडित) के मार्गदर्शन में करना ही श्रेयस्कर है, क्योंकि गलत विधि से पूजा का नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।