बगलामुखी और प्रत्यंगिरा दोनों हिंदू तंत्र विद्या की अत्यंत शक्तिशाली और उग्र देवियां हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य शत्रुओं का नाश, नकारात्मकता को खत्म करना और साधक को सुरक्षा प्रदान करना है। बगलामुखी माता (स्तंभन शक्ति) शत्रुओं को जड़ (stambhan) करने के लिए पूजी जाती हैं, जबकि प्रत्यंगिरा देवी (विपरीत प्रत्यंगिरा) शत्रु के तंत्र-मंत्र को उसी पर वापस भेजने के लिए जानी जाती हैं। इनका संयुक्त “बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच” अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। 

प्रमुख विशेषताएं और लाभ:

  • बगलामुखी माता (Baglamukhi): ये दसमहाविद्या में से एक हैं और इन्हें ‘स्तंभन’ (रोकने) की देवी कहा जाता है। ये शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और शक्ति को स्थिर कर देती हैं।
  • प्रत्यंगिरा देवी (Pratyangira): इन्हें ‘विपरीत प्रत्यंगिरा‘ भी कहते हैं, क्योंकि ये उग्र तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, और बुरी आत्माओं के प्रभाव को नष्ट करने के लिए जानी जाती हैं।
  • बगला प्रत्यंगिरा कवच (Bagla Pratyangira Kavach): यह विशेष कवच शत्रुओं से रक्षा, कानूनी विवादों में विजय, और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए अचूक माना जाता है।
  • साधना: दोनों देवियों की साधना उग्र मानी जाती है, इसलिए इसे गुरु के मार्गदर्शन में करना ही उचित और सुरक्षित होता है।
  • महत्व: यह कवच तब उपयोगी माना जाता है जब शत्रु हर मोड़ पर तंत्र और छल से जीवन में बाधा डाल रहे हों। 

सावधानी: इन शक्तियों की पूजा-अर्चना के लिए उचित साधना और नियम बहुत जरूरी हैं। 

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