शिव-शक्ति हिंदू धर्म में चेतना और ऊर्जा का मूल संतुलन है। शिव (परम पुरुष) शाश्वत चेतना हैं, जबकि शक्ति (आदि शक्ति) सृजन और ऊर्जा का स्रोत हैं। दोनों मिलकर ब्रह्मांड की रचना, संरक्षण और संहार के प्रतीक हैं। “शिव शक्ति” का तात्पर्य अविभाज्य एकता से है, जो आत्मा (शिव) और माया (शक्ति) के मिलन का प्रतिनिधित्व करती है।
मुख्य पहलू:
- आध्यात्मिक अर्थ: शिव अक्रिय (चेतना) हैं और शक्ति सक्रिय (ऊर्जा) हैं। शक्ति के बिना शिव ‘शव’ समान हैं, और शिव के बिना शक्ति का कोई आधार नहीं है।
- अर्थ (मंत्र): “ॐ शिवशक्ति नमः” में शिव को संहारक/मोक्ष और शक्ति को रचनात्मक ऊर्जा के रूप में नमन किया जाता है।
- टेलीविजन शो: “शिव शक्ति – तप त्याग तांडव” (2023) एक भारतीय पौराणिक श्रृंखला है जो कलर्स टीवी पर महादेव और पार्वती की प्रेम यात्रा को दिखाती है।
- सांस्कृतिक महत्व: यह जीव (मनुष्य) और आत्मा का संबंध भी है, जहाँ योग साधना से शक्ति को शिव के साथ जोड़ा जाता है।
यह संतुलन जीवन में सामंजस्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

